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मैं हु ना मेरी जान

जानवी खुश थी उसने अपने घर पर फोन करके बता दिया था जानवी के घर पर भी सब खुश थे अपनी बेटी की कामयाबी ख़ुशी सेलिब्रेट करने के लिए जानवी कीम ने उसकी पसंद का खाना बनाया था जानवी घर आई और उसने अपनी मां को गले लगाया और कहा देखना मां मैं खूब मन लगाकर काम करूंगी और पापा की हेल्प करूंगी हमारी छोटी सी दुकान को बड़े से मॉल में तब्दील कर देगी

जानवी की मां ने उसके सर पर धीरे से मारते हुए कहा पागल कहीं की इतने बड़े-बड़े सपने अभी से देखने लगी और एक दिन भी ऑफिस गई नहीं जानवी ने अपनी मां की तरफ देखा और जोर-जोर से हंसने लग गई यही तो बात थी जानवी में वह जहां भी रहती थी सबको हंसती रहती थी जिससे हर कोई जानवी से अट्रैक्ट हो जाता था जल्दी

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